मंगल दोष

मंगल दोष निवृत्ति का सरल उपाय मंगल देव की भात पूजन

मंगल दोष के शमन का सरल एवं अचूक उपाय मंगल ग्रह का भात पूजन है । जिसके अनुसार सर्वप्रथम पंचाग कर्म जिसमे गणेशाम्बिका पूजन, पुण्याहवाचन, षोडश मातृका एवं सप्त घृत मातृका पूजन, नान्दी श्राद्ध एवं ब्राह्मण पूजन किया जाता है।।तत्पश्चात भगवान मंगल देव का दूध, दही, घी, पिशोतिकाभात पूजन शहद, शकर, अष्टगंध, इत्र एवं भांग से स्नान करा कर मंगल स्त्रोत के पाठ किये जाते है। शिव रुप में होने के कारण। रुद्राभिषेकया शिवमहिम्नस्तोत्र का पाठ भी किया जाता है। उसके बाद पके हुए चावल कोठंडाक उसमें पंचामृत मिलाकर मंगलेश्वर शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है एवं आकर्षक श्रृंगार किया जाता। है। षोडशोपचार पूजन आरती करके अग्निस्थापन, नवग्रह एवं रुद्र स्थापन पूजन कर हवन किया जाता है। विद्वानों के अनुसार मंगल ग्रह की प्रकृति गर्म है। अतः शीतलता एवं मंगल दोष की निवृत्ति के लिये भगवान मंगल देव को भात चढ़ाया जाता है। मंगल दोषयुक्त जातक जिनके विवाह में बाधा आरही हो उन्हे अवश्य मंगलनाथ में भात पूजन करवाना चाहिये।

भात पूजा उज्जैन

भात पूजा उज्जैन

मंगल दोष क्या होता है?

लग्ने व्यये च पाताले जामित्रे चाष्टमें कुजे ।
कन्या भर्तु विनाशाय भर्तु कन्या विनश्यिति॥

ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार जातक की जन्म कुंडली में लग्न, चर्तुथ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश स्थान में अगर मंगल स्थित होते है तो वह मंगल दोष माना जाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव जातक के विवाह पक्ष पर पड़ता है। मंगल दोष के कारण विवाह में अड़चने आती है किसी भी प्रकार से विलम्ब अवश्य होता है। अगर विवाह हो भी जाता है तो दाम्पत्य जीवन सुखी नही। रहता । पति-पत्नी में आपसी मतभेद रहते है और कई बार तलाक की स्थिति भी पैदा हो जाती है।। मंगल दोष युक्त जातको को पत्रिका मिलान कर ही विवाह करना चाहिये ताकि उनका वैवाहिक जीवन सुखीरहे।