विवाह बाधा निवारण
विवाह में हो रही देरी, रुकावट एवं मानसिक तनाव हेतु वैदिक एवं ज्योतिषीय मार्गदर्शन
10+ वर्षों का अनुभव | शुद्ध वैदिक विधि | अनुभवी आचार्य
विवाह बाधा निवारण क्या होता है?
वैदिक ज्योतिष के अनुसार विवाह जीवन का एक महत्वपूर्ण संस्कार माना जाता है।
जब कुंडली में ग्रहों की स्थिति या ग्रह दशा असंतुलित मानी जाती है, तब विवाह में विलंब, बार-बार रुकावट या अनुकूल प्रस्ताव न मिलना जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।
विवाह बाधा निवारण का उद्देश्य ज्योतिषीय विश्लेषण के आधार पर
वैदिक पूजा, मंत्रजाप एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन द्वारा मानसिक संतुलन और सकारात्मकता की कामना करना होता है।
विवाह में बाधा क्यों आती है?
ज्योतिष शास्त्र में विवाह से संबंधित विषयों का विचार मुख्य रूप से:
सप्तम भाव
सप्तमेश ग्रह
शुक्र ग्रह
ग्रह दशा एवं अंतरदशा
के आधार पर किया जाता है।
विवाह में बाधा तब देखी जा सकती है जब:
सप्तम भाव या सप्तमेश ग्रह पीड़ित हो
शुक्र ग्रह अशुभ प्रभाव में हो
मंगल दोष, पितृ दोष या कालसर्प दोष उपस्थित हो
ग्रह दशा अनुकूल न हो
हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है, इसलिए कारण भी भिन्न हो सकते हैं।
विवाह बाधा निवारण हेतु किए जाने वाले उपाय
कुंडली विश्लेषण के आधार पर निम्न वैदिक उपायों का मार्गदर्शन दिया जाता है:
विवाह बाधा निवारण पूजा
मंगल दोष शांति पूजा
नवग्रह शांति पूजा
