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भात पूजा (पितृ दोष निवारण): कारण, महत्व और वैदिक शांति उपाय

भात पूजा क्या होती है?

वैदिक परंपरा के अनुसार जब पितृ दोष के कारण जीवन में बार-बार बाधाएं, विलंब या मानसिक अशांति अनुभव होती है, तब भात पूजा को एक महत्वपूर्ण शांति उपाय माना जाता है।
यह पूजा पूर्वजों की स्मृति, तर्पण एवं आशीर्वाद की कामना हेतु की जाती है।

भात पूजा का उद्देश्य पूर्वजों के प्रति श्रद्धा प्रकट कर पितृ दोष की शांति की कामना करना होता है।

पितृ दोष क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र में पितृ दोष तब माना जाता है जब:

  • कुंडली में सूर्य, चंद्र या राहु-केतु का असंतुलित प्रभाव हो

  • पूर्वजों से संबंधित कर्तव्यों में कमी मानी जाए

  • पारिवारिक कर्मों का प्रभाव जीवन में बाधा उत्पन्न करे

👉 पितृ दोष का प्रभाव हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है।

पितृ दोष के संभावित प्रभाव

पितृ दोष के कारण जीवन में निम्न समस्याएं देखी जा सकती हैं:

  • विवाह में देरी या बार-बार रुकावट

  • संतान से संबंधित चिंता

  • आर्थिक अस्थिरता या अचानक खर्च

  • कार्यों में निरंतर विलंब

  • पारिवारिक तनाव

  • मानसिक बेचैनी एवं असंतोष

⚠️ यह आवश्यक नहीं कि ये सभी प्रभाव हर व्यक्ति में हों।

कुंडली में पितृ दोष की पहचान कैसे होती है?

पितृ दोष की सही पहचान हेतु आवश्यक है:

  • जन्म कुंडली का विस्तृत अध्ययन

  • सूर्य, चंद्र एवं राहु-केतु की स्थिति

  • पंचम और नवम भाव का विश्लेषण

  • वर्तमान एवं आगामी ग्रह दशाएं

बिना कुंडली अध्ययन के पितृ दोष का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जाता।

भात पूजा का महत्व

वैदिक मान्यताओं के अनुसार, भात पूजा द्वारा:

  • पूर्वजों की आत्मा की शांति की कामना

  • पारिवारिक एवं मानसिक संतुलन

  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा

की प्रार्थना की जाती है।

यह पूजा श्रद्धा, संयम और वैदिक विधि के साथ संपन्न की जाती है।

भात पूजा की विधि (संक्षेप में)

भात पूजा में सामान्यतः निम्न विधियां सम्मिलित होती हैं:

  • पितरों का आवाहन एवं तर्पण

  • ब्राह्मण भोजन (भात दान)

  • वैदिक मंत्रोच्चारण

  • शांति पाठ एवं प्रार्थना

पूजा की विधि व्यक्ति की कुंडली एवं परंपरा के अनुसार भिन्न हो सकती है।

भात पूजा कहाँ कराई जाती है?

परंपरा अनुसार भात पूजा
उज्जैन जैसे सिद्ध धार्मिक तीर्थों सहित अन्य उपयुक्त स्थानों
पर वैदिक विधि से कराई जाती है।

👉 स्थान का चयन व्यक्ति की आस्था और सुविधा पर निर्भर करता है।

भात पूजा से क्या लाभ माने जाते हैं?

वैदिक मान्यताओं के अनुसार, भात पूजा द्वारा:

  • मानसिक शांति की अनुभूति

  • पारिवारिक जीवन में संतुलन

  • बाधाओं में कमी की कामना

की जाती है।

⚠️ ध्यान दें:
पूजा का प्रभाव व्यक्ति की आस्था, कर्म और परिस्थिति पर निर्भर करता है।
कोई भी पूजा निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करती।

अनुभवी आचार्य का मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है?

भात पूजा तभी सार्थक मानी जाती है जब:

  • कुंडली का सही विश्लेषण हो

  • वैदिक विधि का पालन हो

  • मंत्रोच्चारण शुद्ध हो

इसलिए अनुभवी एवं विद्वान आचार्य का मार्गदर्शन आवश्यक होता है।

भात पूजा हेतु मार्गदर्शन प्राप्त करें

यदि आप:

  • पितृ दोष से संबंधित जानकारी चाहते हैं

  • भात पूजा के महत्व को समझना चाहते हैं

  • वैदिक दृष्टि से उचित मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहते हैं

तो आप श्री सिद्धिविनायक ज्योतिष केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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स्थान: उज्जैन, मध्य प्रदेश

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Namaste! 🙏 Main Pandit Ji hoon. Aapki kundli ya puja se judi kaise sahayata kar sakta hoon?