ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगल दोष जन्म कुंडली में मंगल ग्रह की विशेष स्थिति के कारण माना जाता है। जब मंगल ग्रह प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित होता है, तब उस स्थिति को मंगल अथवा मांगलिक दोष कहा जाता है।
मंगल दोष पूजा का उद्देश्य ग्रह शांति, मानसिक संतुलन एवं जीवन में सामंजस्य की कामना करना होता है। यह पूजा वैदिक मंत्रों एवं शास्त्रसम्मत विधि से संपन्न कराई जाती है।
मंगल दोष क्या होता है?
मंगल ग्रह को ऊर्जा, साहस और पराक्रम का कारक माना जाता है। जब इसकी स्थिति असंतुलित होती है, तब जीवन में कुछ चुनौतियाँ अनुभव की जा सकती हैं।
मंगल दोष तब माना जाता है जब:
मंगल कुंडली के 1st, 4th, 7th, 8th या 12th भाव में हो
मंगल पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो
ग्रह दशा में मंगल का प्रभाव प्रबल हो
मंगल दोष का प्रभाव हर व्यक्ति पर समान नहीं होता।
मंगल दोष पूजा की विधि
मंगल दोष पूजा में सामान्यतः निम्न विधियाँ सम्मिलित होती हैं:
मंगल ग्रह का वैदिक मंत्रों द्वारा आवाहन
मंगल मंत्रों का जाप
हवन एवं शांति पाठ
ग्रह शांति हेतु प्रार्थना
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