वैदिक ज्योतिष के अनुसार नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु —मानव जीवन के विभिन्न क्षेत्रों को प्रभावित करते हैं।
जब जन्म कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति असंतुलित मानी जाती है,तब नवग्रह शांति पूजा द्वारा ग्रहों की शांति एवं संतुलन की कामना की जाती है।
इस पूजा का उद्देश्य मानसिक स्थिरता, सकारात्मक दृष्टिकोण और आध्यात्मिक संतुलन प्राप्त करना होता है।
कुंडली में नवग्रहों का असंतुलन तब माना जाता है जब:
ग्रह अशुभ भावों में स्थित हों
ग्रहों पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो
ग्रह दशा या अंतरदशा प्रतिकूल हो
ग्रहों की युति जीवन में बार-बार बाधाएं उत्पन्न करे
नवग्रहों का प्रभाव व्यक्ति-विशेष की कुंडली पर निर्भर करता है।